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प्यार तो दो दिलोँ की झाँकी है


प्यार तो दो दिलोँ की झाँकी है
कहीँ मँजिल तो कहीँ बिछुङना बाकी है
सदा दुनिया वाले की आँखोँ मेँ खटकती है मुहब्बत
अभी ईश्क के आगोश मेँ तङपना बाकी है
मुहब्बत मेँ नजरोँ का तकाजा क्या है
गर हो जाए मुहब्बत तो गँवारा क्या है
उतर गई है दिल मेँ वो धङकन बन कर
धङकन को शायद अभी धङकना बाकी है ।

 

तेरे चेहरे की फिर से एक झलक चाहिए


तेरे चेहरे की फिर से एक झलक चाहिए
वो नजरे वो अदा वो हँसी चाहिए
फिदा हुँ तुझपे बस एक मुलाकात मेँ
मिलुँ कैसे दुबारा वो वजह चाहिए
दिल मेँ हसरतेँ अब तुमसे मिलने की है
फिर ना बिछङुँ कभी वो हमसफर चाहिए

 

ना चेहरा ना खुबसुरती से होनी चाहिए


ना चेहरा ना खुबसुरती से होनी चाहिए
अगर प्यार हो तो दिल से होनी चाहिए
ना हो प्रेम मेँ कुछ पाने की आस “सुब्रत”
मुहब्बत किसी से इस कदर होनी चाहिए
दो जिस्मोँ का मिलना ही नहीँ कहलाता संबंध
चाहत मेँ सादगी कुछ इस तरह होनी चाहिए

 

आपसे प्यारा मुझे और क्या होगा


आपसे प्यारा मुझे और क्या  होगा
आपके बगैर मेरा हाल क्या होगा
क्योँ बन गए हो आप मेरे जिने की वजह
भला मेरी आशिकी का इससे बङा सवाल क्या होगा ?

 
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Posted by on 07/04/2016 in शायरी

 

चाहत का यही हाल-ए-दस्तुर होता है


वो जो अपनी मुहब्बत मेँ मगरुर होता है
खुदा जाने क्योँ इसमेँ इतना गरुर होता है
नहीँ मिलती है मुहब्बत हर चाहने वाले को “सुब्रत”
चाहत का यही हाल-ए-दस्तुर होता है ।

 
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Posted by on 07/04/2016 in शायरी

 

कभी दिल से पुकारो तुम वो दौङी आएगी


कभी दिल से पुकारो तुम वो दौङी आएगी
तेरे आँखोँ मेँ वो जमाना भुल जाएगी
रखना रिश्ते को सदा तुम हकीकत के पलङोँ पर
तेरे छाँवो तले वो आशियाना भुल जाएगी
मुहब्बत मेँ नहीँ होती कुछ पाने की चाहत “सुब्रत”
तेरे प्यार के आगे वो खुद को भुल जाएगी

 

मुहब्बत की राह मेँ हम ऐसे मजबुर हुए


मुहब्बत की राह मेँ हम ऐसे मजबुर हुए
ना चाहते हुए भी हम सबसे दुर हुए
डसती है हमेँ अब महफिलोँ की रोशनियाँ
तनहा रहने के लिए हम युँ मशहुर हुए
सुब्रत (6 अप्रेल 2016  )

 
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Posted by on 07/04/2016 in शायरी

 

ख्वाबोँ मेँ भी तेरे सिवा कोई और नहीँ आता


मुझे तेरी मुहब्बत के सिवा कुछ नहीँ आता
एक तेरी याद ही है जो दिल से नहीँ जाता
हो गया हुँ तेरे ईश्क मेँ दिवाना इस कदर
तेरे चेहरे को छोङकर मुझे और कुछ नहीँ भाता
रँग गई है मेरी आशिकी तेरे रँग मेँ युँ सनम
ख्वाबोँ मेँ भी तेरे सिवा कोई और नहीँ आता ।

 

इस कदर मुझसे प्यार कर लो


मेरी वफा पर तो अब एतबार कर लो
एक बार नहीँ तुम सौ बार कर लो
चाहा है मैने तुझे अपने दिल-जिगर से
तुम भी इस कदर मुझसे प्यार कर लो

 
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Posted by on 28/03/2016 in शायरी

 

इंतजार हमेँ भी है


तेरी मुहब्बत पर अब एतबार हमेँ भी है
दिल मेँ तेरी चाहत और प्यार हमेँ भी है
ढुँडती है नजरेँ अक्सर तुमको तन्हाई मेँ
मिलोगी कभी हमको इंतजार हमेँ भी है ।

 
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Posted by on 28/03/2016 in शायरी

 

तो फिर कहाँ से पाओगे औरत की हर एक छवियाँ ?


माँ के अंदर बहन के अंदर बसी होती है लङकियाँ
गर समझो तो अमूल्य होती है लङकियाँ
घर को सँजोने वाली भी होती है लङकियाँ
खुद से भी प्यारी होती है सबको अपनी बेटियाँ
घर सुना-सुना हो जाता है जब रुखसत होती है बेटियाँ
काँटे की चुभन सी बितती है एक पल और एक घङियाँ
हर किसी को प्यारी जब होती है इनकी छवियाँ
तो फिर दुनियाँ क्योँ कतराती है धरा पर लाने मेँ लङकियाँ
गर युँ कतराओगे धरा पर लाने मेँ बेटियाँ
तो फिर कहाँ से पाओगे औरत की हर एक छवियाँ ?

 

ये वक्त भी ना जाने अब कहाँ ठहरा रहता है


हर लम्हा मेरे आसपास तेरी यादोँ का पहरा रहता है
ये वक्त भी ना जाने अब कहाँ ठहरा रहता है
ना रात को करार है ना दिन को सकून है
अब तो बस जहाँ देखुँ तेरा ही चेहरा रहता है ।

 
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Posted by on 12/02/2016 in शायरी

 

मुहब्बत की राह मेँ कोई मिलता है तो कोई साथ छोङ जाती है ।


हमसफर अच्छा हो तो राह कैसी भी हो
गुजर जाती है ।
मुहब्बत की राह मेँ कोई मिलता है तो
कोई साथ छोङ जाती है ।
हर किसी को यहाँ नहीँ मिलता मुहब्बत मेँ
साथ देने वाला
मुहब्बत मेँ कोई लुटता है और कोई किसी को
आबाद कर जाती है ।

 
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Posted by on 12/02/2016 in शायरी

 

वो कहती है ए दिल क्योँ तुने मुहब्बत की


वो कहती है ए दिल क्योँ तुने मुहब्बत की
कभी जो तुने ना किया क्योँ ऐसी शरारत की
नहीँ लगता कहीँ भी दिल अब बिना उनके
मुझसे बिना पुछे कैसे तुने ये जुर्रत की
मैँ कहता हुँ क्योँ कहती हो तुम इस पागल दिल को
ये दिल तो अभी नादान है कैसे बतलाऊँ तुझ को
हाल मेरा वही है जो तुम्हारा हाल है
तुझसे मिलने को तो अब मेरा दिल बेकरार है ।

 
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Posted by on 12/02/2016 in शायरी

 

गर यकीँ ना हो तो मेरा खुन-ए-दिल माँग लो


मेरी मुहब्बत का युँ इम्तहान ना लो
मुहब्बत है तु मेरी बस ये जान लो
नहीँ आता मुझे तेरी मुहब्बत के सिवा कुछ भी
गर यकीँ ना हो तो मेरा खुन-ए-दिल माँग लो

 
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Posted by on 12/02/2016 in शायरी

 

दिल से कोई चाहे ऐसी चाहत कहाँ होती है


नफरत भरी दुनिया मेँ मुहब्बत कहाँ होती है
दिल तो मिलते हैँ मगर ईबादत कहाँ होती है
मिल कर बिछङ जाते हैँ यहाँ पर दिल
दिल से कोई चाहे ऐसी चाहत कहाँ होती है

 
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Posted by on 12/02/2016 in शायरी

 

मेरी साँसे भी शायद तेरे साँसोँ से चलती है


मेरे अंदर कुछ हलचल बस युँ ही चलती है
तेरे बिन मेरी जिँदगी बस माचिस सी जलती है
पास मेरे तुम हो तो परवाह नहीँ अब दुनिया की
मेरी साँसे भी शायद तेरे साँसोँ से चलती है

 
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Posted by on 12/02/2016 in शायरी

 

वफा-ए-मुहब्बत हम ना करते तो क्या करते


वफा-ए-मुहब्बत हम ना करते तो क्या करते
उसकी यादोँ मेँ छुप-छुप कर ना रोते तो क्या करते
उसने तो एक लफ्ज मेँ कह दिया भुल जा मुझे
हम जख्म-ए-दिल ना दिखाते तो क्या करते

 
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Posted by on 12/02/2016 in शायरी

 

ईश्क मेँ मैने ये कैसी ठोकर पाई


ईश्क मेँ मैने ये कैसी ठोकर पाई
की थी मुहब्बत और मिली बेवफाई
ए खुदा अगर अंजाम ए ईश्क ये था
तो क्योँ लिखी थी मेरे किस्मत मेँ मुहब्बत और फिर जुदाई

 
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Posted by on 12/02/2016 in शायरी

 

वफा मैनेँ की है वफा चाहता हुँ


वफा मैनेँ की है वफा चाहता हुँ
खुद से भी ज्यादा मैँ तुझे चाहता हुँ
ना दिन की फिकर ना रात का गम है
जो केवल तुझे देखे वो नजर चाहता हुँ
बैठे रहो तुम पास मेरे ना हो दुरियाँ
जुदा ना हो हम कभी ऐसा हमसफर चाहता हुँ

 
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Posted by on 24/01/2016 in शायरी

 

तेरी चाहत की गहराई मेँ कुछ ऐसे खोया हुँ


तेरी चाहत की गहराई मेँ कुछ ऐसे खोया हुँ

जैसे बरसोँ थकान के बाद आज सोया हुँ

ना आरजू है ना तमन्ना है मेरी जमाने की

एक तुम ही तो हो जिसके लिए मैँ बरसोँ रोया हुँ

 
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Posted by on 29/11/2015 in शायरी

 

कर ली हमने भी मुहब्बत दुनिया को देखकर


कर ली हमने भी मुहब्बत दुनिया को देखकर

जिसे सारी दुनिया करती है वो महज धोखा तो हो नहीँ सकती

 
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Posted by on 29/11/2015 in शायरी

 

तेरी चाहत मेँ मैनेँ खुद को युँ सँवारा है


तेरी चाहत मेँ मैनेँ खुद को युँ सँवारा है
तेरे बिना नहीँ एक पल गँवारा  है
दुर अगर हो जाओ तो जी नहीँ लगता
मैनेँ खुदा से सजदे मेँ सिर्फ तुझे ही माँगा है

 
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Posted by on 26/11/2015 in शायरी

 

आँखोँ मेँ चाहत दिल मेँ प्यार बिछाए बैठे हैँ


आँखोँ मेँ चाहत दिल मेँ प्यार बिछाए बैठे हैँ
अपनी आशिकी मेँ तुझको कुछ युँ सजाए बैठे हैँ
अरमानोँ मेँ बसी हो तुम की तुझे हमसफर बना लुँ
कितने अरसोँ से तुम्हेँ खुद मेँ समाए बैठे हैँ

 
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Posted by on 26/11/2015 in शायरी

 

अगर नहीँ हो तुम तो कयामत ही कयामत है


मेरी जिँदगी अब तेरी अमानत
है
तु है तो मेरी जिँदगी सलामत
है
आरजू नहीँ है अब तेरे बिन जीने की
अगर नहीँ हो तुम तो कयामत ही कयामत है

 
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Posted by on 07/11/2015 in शायरी

 

हमेँ जमाने की आरजू कहाँ थी


हमेँ जमाने की आरजू कहाँ थी
मैँ वहाँ था वो जहाँ थी
सितारोँ की चमक मेँ चाँदनी क्या खुब लगती है
आशिकी वहाँ थी मेरी
तेरी चाहत जहाँ थी
खिदमत को तेरी मैँ चाँद तारे तोङ लाउँ
पेश खुन-ए-दिल था मेरा
तेरी कदमेँ जहाँ थी
कशिश पाने की है तुझे की
दुर तुझसे रह ना पाता हुँ
मैँनेँ खुद को ही पाया तेरी नजरेँ जहाँ थी
लोग मुझे देखकर ये कह देते हैँ
ये ‘सुब्रत’ तेरा दिवाना हैँ
मैनेँ साथ ही पाया तुझे तेरी निशानी जहाँ थी

 

बस दुआ है तुम सलामत रहो


किस्मत की लकीरोँ मेँ तुम नहीँ
शायद
मेरी पुरी जिँदगी पर तेरे नाम
होगी
तुम मुझे बेवफा कहो मुझे परवाह नहीँ
परवाह है तो बस ये कि मेरे बिना तुम भी कैसे खुश होगी

 
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Posted by on 28/10/2015 in शायरी

 

कर दी जिँदगी मैँ थोङी भुल हमने भी


कर दी जिँदगी मैँ थोङी भुल हमने भी
देख ली सपने बेबुनियाद हमने
भी
रेत मेँ चले थे बनाने को घर
इसी सीलसिले मेँ
खो दी खुशी और सकून हमने
भी
नफरत होती है हमेँ अब मुहब्बत के नाम से
इसमेँ कभी अश्क नैनोँ से रुकते नहीँ
जख्मोँ से सनी है मुहब्बत-ए-दाँस्ता
ये ऐसे जख्म है जो कभी युँ दिखते नहीँ
कर देते हैँ ये अंदर ही अंदर खोखला
इसके जख्म कभी भरते नहीँ
लाख भरना चाहो जख्मोँ को तुम
ये उभरते हैँ मगर कभी सुखते नहीँ
नफरत होती हैँ हमेँ अब मुहब्बत के नाम से
होती है मुहब्बत करने वालो की ये सजा
जमाना इसे चैन से जीने देते नहीँ
हर चीजोँ से बेखबर ये मुहब्बत करने वाले
मर जाते हैँ मगर कभी झुकते नहीँ

 

साँस थम जाती है आपके जाने के नाम से


साँस थम जाती है आपके जाने के नाम से ,

दिल मचल उठता है आपके आने के नाम से।

कभी दुर मत जाना की जी नहीँ लगता,

जान चली जाएगी आपको भुलाने के नाम से

 
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Posted by on 11/10/2015 in शायरी

 

अश्को को आँखो से शिकायत इतनी है


अश्को को आँखो से शिकायत इतनी है ,

दिल को मुहब्बत की जरुरत जितनी है।

क्योँ कर देते हो मुझे पास लाकर इतनी दुर,

जब तुझको मुझसे नफरत इतनी है।।

 
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Posted by on 11/10/2015 in शायरी

 

मेरे दिल मेँ तो अब केवल तेरी तस्वीर बसती है


तेरी खुबसुरती का ये फसाना हुआ

ये चाँद भी आज तुम्हारा दिवाना
हुआ

जुल्फोँ को तुम बिखराओ तो घटा बरसती है

हर किसी की जान अब तेरी जान मेँ बसती है

दुपट्टा गर लहराओ तो ही हवा भी चलती है

तेरी साँस को छुने को हर अरमाँ तङपती है

तुम हँसो तो बहारोँ के फुल भी तब खिलते हैँ

भँवर भी तब कहीँ जाकर कुमुदनी से मिलते हैँ

आँखो से कभी जो तुम मदिरा को पिलाती हो

ख्वाबोँ मेँ भी मेरे बस तुम ही याद आती हो

मदमस्त हो जाते हैँ तेरी आँखो मेँ पीनेवाले

शराबी को पैमाने की जरुरत भी तब कहाँ पङती है

तुझे ही देखकर तो गगन मेँ पक्षी भी चहकते हैँ

मेरे दिल मे तो अब केवल तेरी तस्वीर बसती है

मेरे दिल मेँ तो अब केवल तेरी तस्वीर बसती है

 

बेबसी ने मुझे इस कदर सताया है


बेबसी ने मुझे इस कदर सताया है

खुद की लाचारी पर अब मुझे रोना आया है

जिन्दगी तुझसे मैँ एक सवाल पुँछता हुँ

तुने दिया किया है मुझे केवल खोया हुँ

किरदार भी दिया तुमने तो ये कैसा दिया

खुद को ही तुमने खुद से जुदा
किया

ना खुशी दी ना खुशनुमा संसार दिया

ना दिल दी ना मुहब्बत और प्यार दिया

दिया केवल जमाने मेँ तुमने खुदगर्जी की सौगात

अपने ही आज अपनोँ पर लगाए बैठे हैँ घात

खुन के रिश्ते अब खुनोँ की होली खेलते हैँ

सगे संबंधी भी केवल तंज की बोली बोलते हैँ

कुछ नहीँ रह गया है अब इस दुनिया मेँ ए जिँदगी

जिँदा हुँ तो इसलिए की केवल कुछ साँस बाकी है
जो अब तलक चलती है

 

ये सोच ख्यालात बदल जाते है


मंजिल वही रहती है बस सफर बदल जाते है

मुहब्बत भरी दुनिया मेँ हमसफर बदल जाते हैँ

आरजू होती है तुझ मेँ खो जाने की

बेवफा तुम ना हो जाओ कहीँ ये सोच ख्यालात बदल जाते है ।

 
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Posted by on 11/10/2015 in शायरी

 

तुम मेरी गजल बनो मैँ तेरा शायर बन जाउँ


तमन्ना होती है तुम्हेँ हमसफर बना लुँ

दुनिया की नजरोँ से तुझ को बचा लुँ

कर के एलान हाँ मुहब्बत है तुमसे

सारी दुनिया से कहकर खुद मेँ छुपा लुँ

भुल कर दुनिया की रश्म-ओ-रिवाज

तेरी झील से आँखो मेँ खो जाउँ आज

तेरी सादगी मेँ कुछ ऐसा कर जाऊँ

तुम मेरी गजल बनो मैँ तेरा शायर बन जाऊँ

तुम मेरी गजल बनो मैँ तेरा शायर बन जाउँ

 

साँसोँ का क्या भरोसा ये तो टुट जाते हैँ


साँसोँ का क्या भरोसा ये तो टुट जाते हैँ

चंद लम्होँ मेँ सारे रिश्ते-नाते छुट जाते हैँ

जिसे आज तुम अपना-अपना कहते हो

शव पर आकर तेरे बस ये ही कुछ देर रो जाते हैँ

शमशान पर पहुँच कर तेरे ये अपने

वक्त क्या लगेगा जलने मेँ ये सवाल पुछते हैँ

कुछ नहीँ जाता साथ तेरे ए मनुष्य

बस तेरे अच्छे कर्मो का फल ही तेरे काम आते हैँ ।

 

मेरे लफ्जोँ मेँ तेरे सिवा कोई नाम ना हो


मेरे लफ्जोँ मेँ तेरे सिवा कोई नाम ना हो

तेरे बिना मेरी पुरी कोई शाम ना हो

साँस भी चले तो बस तेरे पास होने पे चले

हमारी जिँदगी मेँ गम का कोई नामो निशान ना हो

 
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Posted by on 11/10/2015 in शायरी

 

एक बच्ची को नंगे पैर दौङते देखा करता


शहर की झोपङपट्टी से मैँ कभी कभी गुजरा करता था

एक बच्ची को नंगे पैर दौङते देखा करता था

चिलचिलाती धुप ने सबको बदहाल बना डाला था

उसके चेहरे पर सिकन तक ना थी

शायद भुख ने उसे बेदर्द बना डाला था

मेरी भी इच्छा हुई मै भी नंगे पैर चल कर देखुँ

उस बच्ची की तरह मै भी दौङ कर देखुँ

चप्पल खोल कर मैँने जैसे पैर रोड पर रखा था

सह ना पाया जलती धुप को कुछ भी समझ ना पाया था

इतने मैँ वो बच्ची आकार बोली भैया कुछ दे दो

भुख लगी है कुछ खाउँगी कुछ पैसे तो दे दो

खुद ब खुद हाथ पर्स तक गए मैने दस का नोट हाथ मेँ दे दिया

वो खुशी से उछलने लगी शायद उसके अनुमान से कुछ ज्यादा दे दिया

धन्यवाद कह कुछ खाने को दौङती हुई वो चली गई

मैँ आश्चर्य से देखता रह गया जब तक आँखो से वो ओझल ना हो गई

 

एक गरीब भुख का मारा कुछ ऐसा था करता


एक गरीब भुख का मारा कुछ ऐसा था करता

रोज सुबह रास्ते मेँ अक्सर वो था मिलता

सुबह सुबह वह कचरे के डिब्बे से कुछ था चुनता

आँखे तेज थी उसकी कचरे मेँ कुछ था ढुँडता

सारे पोटली को खोल खोल कर था कुछ वो देखता

कंधे पर उसने एक बोरा बाँधे रखा था

गर मिल जाए कुछ तो वो उसमेँ डाला करता था

लाचारी ने उसे एक पाबंद इंसान बना डाला था

मैँ जग कर दौङने जाउँ इसके लिए अलार्म लगाता था

रोज मगर वो मुझसे पहले अपने जगह पर पहुँचा करता था

शरीर से दुबला मगर उत्साह से भरा वो रहता था

मैँ उसे इस रुप मेँ देख नतमस्तक हो जाया करता था

 

क्युँ ना तेरी जिँदगी मेँ सारी दुनिया वार दुँ


चाहत मे तेरी मैँ जिँदगी सँवार दुँ

जितना किसी ने ना दिया वो मैँ प्यार दुँ

खुदा के बेमिशाल कारीगरी का तोहफा हो तुम

फिर क्युँ ना तेरी जिँदगी मेँ सारी दुनिया वार दुँ

 
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Posted by on 09/10/2015 in शायरी

 

कैसे ना मैँ तुझे खुदा मानता


कितनी मुहब्बत तुमसे है ये मैँ नहीँ जानता

दुवाओँ मेँ कैसे ना मैँ
तुझे माँगता

तमन्ना है मेरी हर वक्त तेरे साथ रहने की

फिर कैसे ना मैँ तुझे खुदा मानता

 
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Posted by on 09/10/2015 in शायरी

 

स्वाभिमान तिरँगा है


स्वाभिमान तिरँगा है
अभिमान तिरँगा है

खुन से रंगे शहिदोँ की पहचान तिरँगा है

हँस कर जो चढ गए फाँसी पर

उन खुदीराम भगत की जान तिरँगा है

लाखोँ ने दिया इसमेँ बलिदान

जालियाँवाला बाग काँड की याद तिरँगा है

खुद से मार ली गोली जिन्होनेँ
और पुरा किया सँकल्प

उन देशभक्त आजाद का नाम तिरँगा है

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा

हम बुलबुले हैँ इनके
हमारी शान तिरँगा है ।
जय हिन्द….जय भारत

 

वरना आन पर जिस दिन आ पङे नामोँ निशान मिटाने वाले हैँ


ना खङग ना तलवार ना किसी भी भाल से

भारत माँ का बेटा हुँ नहीँ किसी भी वार से

भारत माँ की ओर गर कोई अंगुली भी उठाएगा

धर नरसिँहा रुप मैँ दौङा चला आँऊगा

शहिदोँ के खुन से रंगी मिट्टी हिन्दुस्तान की

जान की मुझको खबर नहीँ परवाह है भारत माँ की

माँ की रक्षा खातिर हमने पहना कफन का चोला है

दुश्मन की गोली की परवाह नहीँ हम फौलादी शोला हैँ

कोई बाँट नहीँ सकता हमेँ जाति और मजहबोँ मेँ

हिन्दु-मुस्लिम अलग नहीँ हम सभी है एक मेँ

कोई जाति कोई मजहब अलग नही हैँ देश मेँ

सभी साथ है फर्क यही है अलग-अलग है भेष मेँ

बुरी नजर भी तिरंगा पर अगर कोई डालेगा

माँ के वीर सपुतोँ का फिर हाथ खाली नहीँ रह जाएगा

हर सपुतोँ के हाथ मेँ होगी खुन से रंगी तलवार की

शहिदोँ के खुन से रंगी मिट्टी हिन्दुस्तान की

साथ चलोगे साथ बढोगे तो हम साथ निभाने वाले हैँ

वरना आन पर जिस दिन आ पङे नामोँ निशान मिटाने
वाले हैँ

नाम नहीँ रह जाएगा फिर दुनिया के मानचित्र पर

इतिहास बन कर रह जाओगे फिर देँखेगे तुझे चलचित्र पर

अभी वक्त है अभी सम्भल जा हम गिले-शिकवे भुलाने वाले हैँ

वरना आन पर जिस दिन आ पङे नामोँ निशान मिटाने
वाले हैँ

 
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Posted by on 04/10/2015 in अपनी कविता

 

क्योँ मैनेँ भी किसी बेवफा से दिल को लगाया


हम आशिकी मेँ युँ मशगुल हो गए

तुझे चाहते रहे और हम दुर हो गए

क्या कमी थी मेरे प्यार मेँ ये तो बता दो

चलो कुछ ना तो मेरी खता बता दो

कौन सी गलती की मुझे ऐसी सजा मिली

मैने तो वफा की थी मुझे जफा मिली

अरमाँ थी मेरी तुझे सदा साथ देखने की

बिखरे जुल्फोँ मेँ तेरी घटा देखने की

कैसे मैँ तेरी बेवफाई को समझ ना पाया

क्योँ मैनेँ भी किसी बेवफा से दिल को लगाया

दर्द सिने मे युँ थर्राया ना होता

गर दुसरे के बाँहोँ मेँ तुझे पाया ना होता

चंद लम्होँ मेँ तुमने सब कुछ भुला दिया

वो कसमेँ वो सपने सब कुछ दफा किया

मेरी तुमसे बस एक गुजारिश है

आँखे नम और दिल मेँ ख्वाईश है

मैँ तो सम्भाल लुँगा जो तुमने मुझे दिया

ऐसे जख्म किसी को फिर तुम ना देना

ये दिल है कोई खिलौना मत समझना

दुआ मेरी है खुदा से तु जहाँ रहे वहाँ खुश रहे

मैँ बर्बाद सही मगर तु आबाद रहे

 
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Posted by on 03/10/2015 in अपनी कविता

 

तेरी बाहोँ मेँ अक्सर मैँ सब कुछ भुल जाता हुँ


तेरी बाहोँ मेँ अक्सर मैँ सब कुछ भुल जाता हुँ

दुआओँ मेँ खुदा से बस तुझे माँगता हुँ

तेरे बगैर तन्हाई भी मुझे रास नहीँ आती

दुर गर हो जाऊँ मिलने की वजह माँगता हुँ

मेरी साँसे भी अब नाराज रहती है मुझसे

दुर तुम हो तो कहाँ जान रहती है मुझमेँ

सजदे मेँ सिर्फ तुझे माँगता हुँ

तेरी बाहोँ मेँ अक्सर मैँ सब कुछ भुल जाता हुँ

कब मालुम नहीँ मगर जरुरत बन गई हो मेरी

हर वक्त मेरे सामने तस्वीर रहती है तेरी

तेरी जुल्फोँ मेँ उलझने को जी चाहता है

तेरी बाहोँ मेँ अक्सर मैँ सब कुछ भुल जाता हुँ

 

कर दी जिँदगी मैँ थोङी भुल हमने भी


कर दी जिँदगी मैँ थोङी भुल हमने भी

देख ली सपने बेबुनियाद हमने
भी

रेत मेँ चले थे बनाने को घर
इसी सीलसिले मेँ

खो दी खुशी और सकून हमने
भी

नफरत होती है हमेँ अब मुहब्बत के नाम से

इसमेँ कभी अश्क नैनोँ से रुकते नहीँ

जख्मोँ से सनी है मुहब्बत-ए-दाँस्ता

ये ऐसे जख्म है जो कभी युँ दिखते नहीँ

कर देते हैँ ये अंदर ही अंदर खोखला

इसके जख्म कभी भरते नहीँ

लाख भरना चाहो जख्मोँ को तुम

ये उभरते हैँ मगर कभी सुखते नहीँ

नफरत होती हैँ हमेँ अब मुहब्बत के नाम से

होती है मुहब्बत करने वालो की ये सजा

जमाना इसे चैन से जीने देते नहीँ

हर चीजोँ से बेखबर ये मुहब्बत करने वाले

मर जाते हैँ मगर कभी झुकते नहीँ

 
Comments Off on कर दी जिँदगी मैँ थोङी भुल हमने भी

Posted by on 17/09/2015 in अपनी कविता

 

दिल कल भी तुम्हारा था दिल अब भी तुम्हारा है


जब से दिखाए हैँ तुने चाहत के दिन,

तेरे बिना नही एक पल गँवारा है।

सुन सको तो सुनना मेरे धङकन की तलब,

दिल कल भी तुम्हारा था दिल अब भी तुम्हारा है ।।

क्योँ सोचते हो तुम अब मुझे तुमसे प्यार नहीँ,

भला वो भी कभी दुर हो सकता है

जो रग-रग मेँ समाया है ।

भुल नहीँ पाया एक पल भी तुमको,

मेरे हर ओर तेरा ही साया है ।।

हो सके तो लौट आना तुम मेरी जिन्दगी मेँ,

तेरे लिए मैँने एक-एक पल सँवारा है ।

ये कुदरत भी कैसे-कैसे खेल दिखाती है हमेँ,

एक बार तो गलती कर दी फिर ना कहुँगा ये वक्त हमारा है ।।

 

साँस क्या है मैँ तो दिल मेँ बसाउँगा तुम्हेँ..


साँस क्या है मैँ तो दिल मेँ बसाउँगा तुम्हेँ..

जिगर के रास्ते धङकन मेँ बसाउँगा तुम्हेँ..

मालुम है हमेँ भी ये दुनिया बङी बेरहम है..

दुनिया से लङ लुँगा मगर जान बनाऊँगा तुम्हेँ

 
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Posted by on 21/08/2015 in शायरी

 

दे देता जान आपके लिये


दे देता जान आपके लिये

कभी एक बार बोल तो दिया होता .

मुहब्बत है बेपनाह आपसे

कभी एक बार एहसास दिला तो दिया होता ।

आज जब आप दुर हो तो बहुत याद आती है आपकी

जुबाँ से ना सही कभी नजरोँ से बता तो दिया होता .

बसा लेता दिल मेँ सारी दुनिया को बता कर

कभी हाथ पकङकर साथ चलकर दिखा तो दिया होता .
प्रेषक => सुब्रत आनंद

 
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Posted by on 21/08/2015 in शायरी

 

वो बचपन की यादेँ वो नटखट जमाने


वो बचपन की यादेँ
वो नटखट जमाने
वो कागज की कश्ती

मुझे आज भी याद है

वो परियोँ की रानी
मैँ परियोँ का राजा
वो सपनोँ मेँ उङना

मुझे आज भी याद है

वो माँ का आँचल
और माँ की लोरी
वो गा कर सुलाना

मुझे आज भी याद है

कभी राजा बनाना
कभी भुतोँ से डराना
वो नानी की कहानी

मुझे आज भी याद है

गलती गर हो जाए
वो पापा का डर
वो माँ के गुस्से
से कहीँ छुप जाना

मुझे आज भी याद है ।

अब रह गई है
बस वो पुरानी यादेँ
कुछ धुँधला सा पल
कुछ धुँधले से लम्हेँ
अब तो कुछ रहा नहीँ
ना परियोँ का राजा
ना नानी की कहानी
ना माँ की लोरी
वो बिता जमाना

मुझे आज भी याद है

गर हो सके तो मुझको लौटा दे
वो कागज की कश्ती
वो बारिस का पानी
से खुद को भिँगोना

मुझे आज भी याद है

वो कागज की कश्ती
वो बारिस का पानी
वो मौसम सुहाना

मुझे आज भी याद है ।

 

मेरी चाहत का इतना इम्तिहान मत ले


मेरी चाहत का इतना इम्तिहान मत ले
दिल तोङने का इल्जाम मुझे मत दे
मैँ तो आशिक हुँ दिल तोङना मुझे नहीँ आता
ईश्क का पुजारी हुँ बेवफा नाम मत दे

 
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Posted by on 16/08/2015 in शायरी

 
 
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